Chapter 1
सूक्ष्म व्यायाम (Warm ups)
अंग संचालन को सूक्ष्म व्यायाम भी कहा जाता है। कुछ लोग इसे तोड़-मरोड़कर एरोबिक्स के नाम से कराते हैं। हालांकि अंग संचालन स्कूल में पीटी के नाम से भी कराया जाता है। लेकिन है तो यह सूक्ष्म व्यायाम ही जोकि योग आसन करने से पूर्व कराया जाता है। इसका बहुत महत्व है। इसमें अभ्यस्त होने के बाद ही योग आसन करना चाहिए।
अंग संचालन या सूक्ष्म व्यायाम के अंतर्गत नेत्र, गर्दन, कंधे, हाथ-पैरों की एड़ी-पंजे, घुटने, नितंब- कुल्हों आदि अंगों की एक्सरसाइज की जाती है।
सूक्ष्म व्यायाम कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। यह चोट को रोकने में मदद करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सूक्ष्म व्यायाम निम्न स्तर गतिविधि है, जो खींच और अधिक ज़ोरदार अभ्यास करने से पहले पूरा किया जाना चाहिए। वार्म अपसूक्ष्म व्यायाम का उद्देश्य जोरदार गतिविधि के लिए पूरे शरीर को तैयार करने
Basic Warm ups
- Neck rotation
- Shoulder rotation
- Back rotation
- Side stretch
- Front and back stretch
- Triangle stretch
- Waist rotation
- Legs stretch
- Knee rotation
- Calf raise
Warm ups
- Jogging
- Skipping
- Twisted skips
- Squat
- Front kick
- Lunges
- Cross kicks
Chapter 2
सूर्यनमस्कार योग - विधि और लाभ
सूर्यनमस्कार में कुल 12 आसन किये जाते हैं सूर्यनमस्कार करने का सबसे शुभ समय सूर्योदय का होता हैं। अगर संभव हो तो इसे सूर्य की तरफ मुख कर स्वच्छ हवादार स्थान करने से ज्यादा लाभ होता हैं।
सूर्यनमस्कार करने का क्रम इस प्रकार हैं :
- प्रणामासन :
- हस्तउतानासन
- पादहस्तासन
- अश्वसंचालनासन
- पर्वतासन
- अष्टांग नमस्कार
- भुजंगासन
- पर्वतासन
- अश्वसंचालानासन
- पादहस्तासन
- हस्तउत्तानासन
- प्रणामासन
- संपूर्ण शरीर लचीला बनता हैं।
- वजन कम करने में सहायक हैं।
- बालो का झड़ना और सफ़ेद होना कम होता हैं।
- शरीर की सभी प्रणालिया जैसे की - पाचन, श्वसन, प्रजनन, तंत्रिका और अन्तःस्त्रावी ग्रंथि को संतुलित किया जाता हैं।
Chapter 3
- ताड़ासन
- त्रियक ताड़ासन
- उत्कटासन
- त्रियक उत्कटासन
- वृक्षासन
- नटराजसन
- विरभद्रसन
- कोणासन
- शीश पादोत्तनासन
- सन्तुलनसंन
Chapter 4
बैठ कर करने वाले आसन
- पद्मासन
- वज्रासन
- उष्ट्रासन
- शशांकासन
- जानुशिरासन
- पचिम उत्तानासन
- परिवृत्त जानुशिरासन
- गोमुखासन
- मण्डूकासन
- पर्वतासन
- त्रियक पर्वतास
Chapter 5
पेट के बल आसन
- चक्रासन
- सेतुबंधासन
- सर्वांगासन
- हलासन
- पवनमुक्तासन
- मत्स्यासन
- सुप्त कपोतासन
Chapter 6
पीठ के बल आसन
- मकरासन
- अधोमुख मण्डूकासन
- अष्टांगसन
- अर्ध धनुरासन
- विपरीत नौकासन
- मंजरासन
- चतुरंगासन
- सर्पासन
- त्रियक भुजंगासन
Chapter 7
प्राणायाम और मुद्रा
- कुम्भक
- रेचक
- अंतह कुम्भक
- बाहय कुम्भक
- उज्जयी प्राणायाम
- सूर्य भेदन प्राणायाम
- चन्द्र भेदन प्राणायाम
- मूल बंध
- उड्डियान बंध
- जालंधर बंध
- अश्वनी मुद्रा
- केचरी मुद्रा
- केचरी मुद्रा
- शीतली प्राणायाम
Chapter 8
हस्त मुद्रा
हाथों की 10 अँगुलियों से विशेष प्रकार की आकृतियाँ बनाना ही हस्त मुद्रा कही गई है। हाथों की सारी अँगुलियों में पाँचों तत्व मौजूद होते हैं जैसे अँगूठे में अग्नि तत्व, तर्जनी अँगुली में वायु तत्व, मध्यमा अँगुली में आकाश तत्व, अनामिका अँगुली में पृथ्वी तत्व और कनिष्का अँगुली में जल तत्व।
अँगुलियों के पाँचों वर्ग से अलग-अलग विद्युत धारा बहती है। इसलिए मुद्रा विज्ञान में जब अँगुलियों का रोगानुसार आपसी स्पर्श करते हैं, तब रुकी हुई या असंतुलित विद्युत बहकर शरीर की शक्ति को पुन: जाग देती है और हमारा शरीर निरोग होने लगता है। ये अद्भुत मुद्राएँ करते ही यह अपना असर दिखाना शुरू कर देती हैं। किसी भी मुद्राको करते समय जिन अँगुलियोंका
कोई काम न हो उन्हें सीधी रखे ।
- ज्ञान-मुद्रा
- वायु-मुद्रा
- आकाश-मुद्रा
- शून्य-मुद्रा
- पृथ्वी-मुद्रा
- सूर्य-मुद्रा
- वरुण-मुद्रा
- अपान-मुद्रा
- अपान वायु या हृदय-रोग-मुद्रा
- प्राण-मुद्रा
Chapter 9
मधुमेह (Diabetes )
मधुमेह या चीनी की बीमारी एक खतरनाक रोग है। यह बीमारी में हमारे शरीर में अग्नाशय द्वारा इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण होती है। रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है, साथ ही इन मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अवयव भी असामान्य हो जाते हैं। धमनियों में बदलाव होते हैं। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है।
प्राणयाम और आसन मधुमेह ठीक करने के लिए
- कपालभाति प्राणयाम ५ से १० मिनट
- अनुलोम विलोम प्राणायम ५ से १० मिनट
- उड्डियान बंध ३ से ५ बार
- वज्रासन
- मण्डूकासन
- जानुशिरासन
- पश्चिम उत्तानासन
- कमर चक्रासन
- हलासन
- नौकासन
- पद संचलान
- भुजंगासन
- सलभासन
- धनुरासन
- शवासन
Chapter 10
साइटिका नसों में होने वाला एक ऐसा दर्द है, जो कमर के निचले हिस्सों से शुरू होकर पैरों के नीचे तक जाता है। साइटिका नस रूट से शुरू होकर स्पाइनल कोड तक जाती है। डिस्क प्रोलैप्स, सैक्रोलाइटिस, स्पाइनल कोड और स्पाइनल ट्यूमर में इंफेक्शन साइटिका की वजह मानी जाती है। साइटिका की शुरुआत में कमर में दर्द और पैरों के पंजों में दर्द होता है।
प्राणयाम और आसन साइटिका ठीक करने के लिए
- भस्त्रिका प्राणायाम २ से ३ मिनट
- कपालभाति प्राणायाम ५ मिनट
- अनुलोम विलोम प्राणायाम ५ मिनट
- मूल बंध ५ से १० बार
- अश्वनी मुद्रा ३ से ५ मिनट
- ताड़ासन
- तिर्यक ताड़ासन
- त्रिकोणासन
- कोणासन
- कन्द्रासन १० से १५ बार
- कमर चक्रासन १० से १५ बार
- पाद संचालन (एक पैर से)
- पवनमुक्तासन
- भुजंगासन १० से १५ बार
- सलभासन एक पैर से १० से १५ बार
- मंजरासन १० से १५ बार
- सवासन ५ मिनट
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